आघे चो बीज के सम्हालतो बिता किसान (in Halbi language of Bastar )

By इमली महुआ विद्यालय के सदस्यों द्वारा अनुवादित; मूल लेखक बाबा मायारामonMar. 21, 2016in Food and Water

ए हार बाबूलाल दाहिया इजिक परेषान दखलो। हुनचो परेषानी चो कारण अभी अभी जे तेजाब संगे मिललो बीती पानी खुबे गीरु रहे हुन आय जेचो कारण धान में बीमारी लगली । फेरले बले ए काजे हुन खुबे दुखी नी रहे कसन की जे धान तुरिया आय अउर जे धान तुरिया ले इजिक आगर दिन बीतिन आय हुन अच्छा रहे । अउर जे धान माई आय हनी में बीमारी लगलो आय ।

मैं हुनमनचो गाँव में दूसरा हार जाऊँन रहे। पिथौराबाद सतना जिला चो उचहेरा ब्लाक में आसे । हुन गाँव मैहर ले लगभग 30 किलोमीटर दूर आसे। जब अमरले तब साँज हउ रहे। दूसरा दिन बिहाने हम हुनमनचो बेड़ा बाटे गेलूँ । हुता हुनमन बीतलो 10 साल ले देसी धान चो बीज के अच्छा ले संगासोत अउर हुनचो बीज के बले बढ़ासोत।

बाबूलाल दाहिया सांगते रहे कि सिमेंट कारखाना अउर गाड़ीमन चो धुआँ चो कारण हवा में तेजाब जमते रहेसे अउर हुनचोय कारण तेजाब बीतिन पानी गीरुन रहे । जहाँ रुखमन रहोत हुनचो खाले चो धान अच्छा रहे कसन की रुखमन हुनके बचालासोत हुतरोले बाचलो धान में बीमारी लगलीसे।

बाबूलाल दाहिया चो 8 एकड़ जमीन आसे । ए सपाय जमीन में हुन देसी धान बुनेसे अउर हुता सरकारी खत नी डाले। एचो अलावा बाबूलाल दाहिया उचहेरा ब्लाक चो 30 गाँव चो किसान मन संग मिलुनभाती देसी धान, कोदो, कुटकी, अउर जोन्द्री चो खेती करेसे ।

आघे बाबूलाल दाहिया पोस्टमास्टर रहे। हुनके खेती करतो चो अलावा कहानी, गीत, लिखतो अच्छा लागे। बघेली में सब हुनके हुनचो कहानी अउर गीत मन काजे जानसोत । लेकिन जबले हुनके समझ में इली कि गाँव चो गीत, रितिरीवाज, तिहार, संस्कृति, अउर खेती बीतिन चीज मन हजते जायसे तेबले बाबूलाल जी हुनके बचातो बूता में लगलोसे ।

हुनचो लग 110 किसम चो देसी धान आसे। ए सपाय धान चो बारे में हुन अलग अलग नानी नानी जानकारी खोजलोसे अउर बाबूलाल जी सपाय धान चो बारे में अच्छा जानलोसे । हुन हर साल अपन चो बेड़ा में अई धान मन के बुनेसे अउर हुनमनचो बारे में जानकारी बले खोजेसे।

दाहिया जी बलेसे कि हम बिस्वास ले बलुक सकुंसे कि धान अउर कोदो हमचो इलाका चो अनाज आत । ए दुनो चो जंगली किसम अभी बले आसोत । जंगली किसम चो धान के कापनी (पसही ) बलसोत । नांगर षष्टी तिहार में डौकीमन उपास रहुन एचोय भात खासोत । कापनी धान खोदरा, तरई में होयसे।

ए धान खोदरा, तरई में अपले जागेसे, झडेसे अउर हुनचो बीज में बदल बले होते रहेसे। ए हउक सकेसे कि मनुख मन एचो बारे में जानला अउर खुबे दिन आघे एके खोदरा, तरई ले निकराउन भाती अपन चो बेड़ा में जगाउक सुरु करला, जहाँ खुबे दिन तक पानी रहे । अउर एचोय चाउर के हमचो काजे भात बनाउक सुरु करला।

हुन सांगेसे कि आघे हमचो क्षेत्र में कई किसम चो धान रहोत। एमन एक दूसरा ले खुबे अलग अलग आसोत। जसन कि गलरी चिड़ई चो आँखी असन गलरी धान दखेसे । असने कोनी धान चो चाउर पंडरा रहेसे तो काचोय लाल । काचोय करीया तो काचोय बैंगनी अउर काचोय रंग माटी असन। काचोय चाउर पतला, काचोय गोल अउर काचोय लाम। कोनी किसम चो धान चो बूटा हरा अउर कोनी दूसरा धान चो बूटा बैंगनी दखेसे। ए सपाय एक दूसरा ले अलग अलग आसोत, अलग दखसोत । हुनमनचो अलग अलग रंग अउर अलग स्वाद बले लागेसे अउर सपाय खुबे सुंदर दखसोत। हमचो आघे चो देसी धान चो बारे में लोग मन खुबे कहानी किस्सा बले सांगसोत।

हुनमन में कोनी धान अच्छा गंधतो बीतिन रसोत अउर कोनी नी रहोत । कम दिन में पाकतो अउर आगर दिन में पाकतो किसम चो धान मन आसोत । जे जमीन में ज्यादा दिन पानी नी रहे, असन हल्की जमीन में 70 ले 75 दिन में पाकतो बीतिन सरया, सिकिया, ष्यामजीर,डिहुला अउर सरेखनी किसम चो धान बुनसोत । अउर नेवारी, झोलान, करगी, मुनगर अउर सेंकुरगार किसम चो धान 100 ले 120 दिन में पाकसोत । एचो अलावा 120 ले 130 दिन में बादलफूल, केराखम्ह, विष्णुभोग अउर दिलबक्सा धान पाकसोत।

लैला मजनू धान में दूई दाना पंडरा चाउर निकरेसे। कलावती चो पान बले करिया रहेसे। गांजा कलि खुबे उपजेसे । अलग अलग धान के बुनतो चो अलग अलग कारण रहेसे । जे धान बेड़ा मांगेसे किसान हुनके बुनेसे । जे जमीन में पानी कम दिन रहेसे किसान मन हुता झटके पाकतो बीतिन धान बुनसोत।

कोनी धान असन बले रसोत जे के किसान अपल मन चो खातो काजे बुनसोत । बजरंगा । असने धान आय जे पेट में खुबे दाँय तक रहेसे अउर जल्दी नी पचे। कोनी धान असन बले आसोत जे के किसान मन हाट में बिकुक लाय बुनसोत । एचो अच्छा पैसा मिरेसे। गांजाकलि, निबारी, कोसमखंड अउर लचई असने किसम चो धान आत। कोनी कोनी धान असन बले आसोत जे के सगा मन काजे बुनसोत जसन कमलश्री, तिलसांड, विष्णुभोग अउर बादषाह भोग।

बन बरहा ले धान के बचातो काजे किसान मन काटा बीतिन धान के बुनसोत । ए चो बारे में एक ठन गोठ बले आसे – धान बोवै करगी, सुवर खाय न समधी। एचो मतलब आय किसान मनके करगी धान के बुनतो आय हुनमें इतरो सुकुल काटा रसोत कि बरहा बले नी खाय अउर समधी के बले खाउक देतो नोहोय।

देसी धान चो खासियत सांगते दाहिया जी आगे सांगेसे कि देसी धान चो स्वाद असन काचोय स्वाद नीहोय। तब तो ए धान चो दाम बले अच्छा मिरेसे । जबकी हायब्रिड धान चो स्वाद नी होय। देसी धान में गोबर खत लगालो में धान होउआय,जबकी हायब्रिड अउर खुटी किसम चो धान के सरकारी खत लागेसे। एचो काजे खुबे पैसा खरचा होयसे अउर मुँय बले कमजोर होते जायसे।

देसी धान मौसम संग पाकेसे। हमी एक किसम चो धान के अलग अलग दाँय बुनुसे फेरले हुन सपाय धान लगभग एक ही समय में पाकसोत। मतलब एक किसम चो धान के हमी 1 जुलाई के बुनुसे अउर हुनी जाती के 1 अगस्त के बले बुनुसे तबले बले हुन दूनो धान बराबर दॉय या अजिक आघे पासे पाकुन तियार हउआत।

देसी धान के घने घने नींदुक नी पड़े। ए धान चो बुटा खुबे लंबा होयसे तेचो कारण लाटा एके दबाउक नी सके। ए धान चो बुटा मन के जे कीड़ा मन खासोत हुनके मोकोड़ा, ओन्डार मोछी, चाटी अउर दूसरा कीड़ा मन खाउन देसोत अउर हुनमनके कम करसोत। केंचुआ मन दिनभर खाले चो माटी के उपरे आनुन अउर उपरे चो माटी के खाले नेउन माटी के अच्छा मिलासोत अउर भुंय के मुलायम करसोत । एचोय कारण बुटा मन अच्छा बाढ़सोत ।

हमचो आघे चो सियान मन बदरी चो रंग, हवा कोन बाटले बोहेसे, पानी नी गीरे या गीरतो बंद होयसे ए सबके दखुन पासे चो हवा पानी अउर मौसम चो बारे में आघे ले जानुन रहुआत । जसन हमी बलुंसे – पुरबा ले पुरबाई पाबै सूखी नदियाँ नाव चलाबै । जब पूर्व नक्षत्र में पूरब दिसा ले हवा चलेसे तब इतरो पानी गिरेसे कि सुखलो नदी मन में बले डोंगा चलाउक होयसे।

दाहिया जी सांगेसे जसन हमचो देसी धान सरते जायसे उसने हुनचो संग जुड़लो, अउर हमचो परंपरागत खेती चो संग जुड़लो खुबे षब्द हजते जासोत। सपाय खेती ले जुड़लो संस्कृति अउर जीवतो चो ढंग हजते जासोत । अदाय हमचो बुता गेहूँ , चाउर अउर दार जसन षब्द ले चलेसे । फेरले आघे खुबे अनाज रहोत । जसन समा, कोदो, कुटकी, मूंग, उड़ीद, जोन्दरी अउर तिल। ए सपाय के बुनतो ले काटतो तक खुबे नानी नानी काम करुक पड़ते रहे।

बुनतो, बखरातो, बियासी, निंदाई – गुड़ाई, मिंजाई, उड़ातो अउर बीज के संगातो ( ढुसी में भरतो ) असन बेड़ा बुता में हर काम चो अलग नाम रहे। ए षब्द मन षब्दकोष में नी रहोत फेरले हमचो भासा में ए सपाय षब्द मन आसोत। हमचो सियान मन के अभी बले ए षब्द मन के सुरता करलो में खुबे अच्छा लागेसे। आघे बेड़ा में अलग अलग बीज के बुनोत अदाय हुनी हुनी बीज के घने घने बुनसोत अउर एचोय कारण हमाचो सपाय षब्द मन चो कहीं काम नी होय अउर हमी हुनके भुलकते जाऊँसे।

खुटी धान अउर देसी धान चो बारे में जानकारी जुहातो बीता दाहिया जी सांगलो कि देसी किसम चो धान हुता चो हवा ,पानी चो अनुसार अपन के बदलते रहेसे। जसन की आघतले सूखा ले लड़ते अउर हजारों साल ले अई माटी में जागते जागते देसी धान मन अपन चो बूटा के लंबा करलासोत जेचो कारण धान अपन चो बूटा में खुबे पानी के सोकून रहेसे। पाछे खेनस निकरलो बेरा ओस में बले पाकेसे । बाहर ले आनलो खूटी किसम चो धान मन में असन ताकत नी रहे।

आघे हमचो बाट बले 1 लाख ले बले आगर किसम चो देसी धान मन रते रला । अदांय सरुन भाती खुबे कम किसम चो धान बाचलासोत । इतरो किसम चो धान में दाहिया जी लगे अदाय 110 किसम चो धान बाचलासोत । जे के हुन अच्छा ले संगायसे अउर हुन बीज के बले बढ़ायसे।

सपाय दुनिया में परसीध खेती चो बिज्ञानी डॉ आर एच रिछारिया हुनी मनुख आय जे नी अलगलो मध्यप्रदेष (जे में छत्तीसगढ़ बल मिलुन रहे ) में देसी धान चो 17 हजार किसम के किसान मन लग ले जुहाउन रहे। ए में आगर उपजतो बीतिन, अच्छा गंधतो बीतिन, अउर अच्छा लागतो बीतिन धान मन रहोत।

बाबूलाल दाहिया चो सांगतो अनुसार बिज्ञानी मन बलसोत कि 1 किलो धान के जगातो काजे 3 हजार लीटर पानी लागेसे। इतरो पानी काजे धान कमातो बिता गाँव चो किसान मन उपर ले गिरतो बीतिन पानी के टाकसोत। पानी गिरली जाले तो ठीक आय , तेबले भुंय चो खाले चो पानी निकराउन धान कमातो में जुगय घाटा आय। कसन की असन करलो में भुंय चो पानी सरुन भाती खाले जायसे ।

दाहिया जी सांगेसे कि हमचो बाट चो नदी मन उत्तर भारत चो असन हिम नदी नोहोत । हुता चो नदी मन में सालभर हिमालय ले बर्फ चो पानी बनुन अयसे । जब हुता पानी नी गिरे तेबे बल नदी मन में पानी रहेसे। हमचो बाट चो नदी मन हिमपुत्री नोहोत एमन बनपुत्री आत। ए नदी मन में पानी तेबे रहुआय जब हमचो जंगल रहुआय। जब हमचो जंगल रहुआय तब हम पानी चो अच्छा ले उपयोग करवाँ ।

अगर हमी तीन तीन चार चार , ज्यादा पानी जेके लागेसे असन बीज के हर साल बुनवां तब हमचो भुंय खुबे कमजोर होयदे। रुख राई बुटा मन सुखते जादे। जब जंगल नी रहेदे तब पानी नी गिरेदे। जसन हवाई अडडा चो बीना हवाई जहाज नी उतरेसे उसने बीना जंगल चो बादर ले पानी नी गिरे । एई काजे यदि हमके धान चो खेती खुबे साल तक करतो आय जाले जंगल के बचातो जरुरी आय अउर कम पानी बीतिन देसी धान के अपन चो बेड़ा में कमातो बले जरुरी आय।

कुछ साल आघे ले बाबूलाल दाहिया जी देसी धान चो बीज के बचातो काजे लोग मन के सांगतो चो काम करेसे। एचो काजे हुन सर्जना सामाजिक सांस्कृतिक अउर साहित्यिक मंच बनालोसे। जेचो माध्यम ले हमचो परंपरा चो देसी बीज चो बारे में लोग मन के जानकारी देतो काम करेसे । हुन इस्कुल चो पीलामन के प्रकृति चो जीव विविधता – वनस्पति अउर प्राणी मन कितरो अलग अलग जाति चो आसोत हुनचो बारे में जानकारी दयसे । हुन 30 गाँव चो किसान मन संग देसी धान चो खेती बले करेसे। हुन देष भर में किंजरुन किंजरुन भाती किसान मन चो मीटिंग में जायसे अउर देसी धान के बचातो काजे सांगेसे। ए बूता काजे हुनके खुबे सम्मान बले मिरलीसे। हुनचो ए काम खुबे अच्छा आय। हमके बले हुनचो गोठ के सुनुन भाती अदाय उसने करतो आय।

अनुवाद ( हिन्दी ले )
सदस्य
इमली महुआ विद्यालय
बालेंगा पारा, पोस्ट – किबई बालेंगा
कोण्डागाँव – 494226
छत्तीसगढ़


मूल लेखक बाबा मायाराम से संपर्क करें
मूल लेख हिंदी में पढ़ें – बीज विरासत को सहेजता किसान
Read the English translation of the story – A farmer saving our heritage of Seeds

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