आघे चो बीज के सम्हालतो बिता किसान (in Halbi language of Bastar )

By इमली महुआ विद्यालय के सदस्यों द्वारा अनुवादित; मूल लेखक बाबा मायाराम on March 21, 2016 in Food and Water

Original Hindi story written, and this translation into Halbi done specially for Vikalp Sangam

विकल्प संगम चो व्याबसाइट काजे लिखलासोत

(Aaghe cho beej ko samhalto bita kisaan)

ए हार बाबूलाल दाहिया इजिक परेषान दखलो. हुनचो परेशानी चो कारण अभी अभी जे तेजाब संगे मिललो बीती पानी खूबे गीरु रहे हुन आय जेचो कारण धान में बीमारी लगली. फेरले बले ए काजे हुन खूबे दुखी नई रहे कसन की जे धान तुरिया आय अउर जे धान तुरिया ले इजिक आगर दिन बीतीं आय हुन अच्छा रहे. अउर जे धान माई माय हुनी में बीमारी लगलो आय.

हुनचो  लग ११० किसम चो देसी धान आसे. ए सपाय धान चो बारे में हुन अलग अलग नानी नानी जानकारी खोजलोसे.

पूरा लेख पढें

(उनके पास देशी धान की 110 किस्में हैं। इन सभी धान के गुणधर्मों का उन्होंने बारीकी से अध्ययन किया है। वे हर साल इन्हें अपने खेत में बोते हैं और अध्ययन करते हैं)

मूल लेखक बाबा मायाराम से संपर्क करें

मूल लेख हिंदी में पढ़ें - बीज विरासत को सहेजता किसान

Read the English translation of the story (A farmer saving our heritage of Seeds)




Story Tags: agricultural biodiversity, Food Sovereignty, Nutritional Security, grain bank, organic farming, organic agriculture, organic, seed savers, seed diversity, organic seeds

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