फुटपाथ पर पौष्टिक भोजन (in Hindi)

By बाबा मायाराम onDec. 18, 2018in Food and Water

विकल्प संगम के लिये लिखा गया विशेष लेख  (SPECIALLY WRITTEN FOR VIKALP SANGAM)

(Footpath par Paushtik Bhojan)

दिल्ली में पौष्टिक भोजन की अनूठी पहल चल रही है। जिसका नाम है गुड फ़ूड फार आल (यानी सबके लिए पौष्टिक भोजन)। इसे जनपहल नामक संस्था ने शुरू किया है। इसमें रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर, किसान, उपभोक्ता, समुदाय और खाद्य विक्रेताओं को जोड़ा गया है।

गैर सरकारी संस्थाओं और संबंधित सरकारी विभागों का भी इसमें सहयोग लिया जा रहा है। इस सबका फौरी असर यह हुआ है कि पौष्टिक अनाजों से बनी खाद्य वस्तुओं के बारे में जागरूकता बढ़ी है, और ये चीजें फुटपाथ पर उपलब्ध होने लगी हैं।

दिल्ली को मुस्कानों की नगरी व देश का दिल कहा जाता है। यहां की कई विशेषताएं हैं। कई दर्शनीय स्थल हैं। बड़ी-बड़ी इमारते हैं। चिकनी सड़कें हैं और उन पर दौड़ती चमचमाती कारें हैं। इन सड़कों पर सरकती सजा-धजा मानव समूहों की धारा है।

ई रिक्शा पर गुड फ़ूड का प्रचार

लेकिन यहां की भीड़ भरी सड़कों के किनारे, व्यस्त मोड़ों पर, फुटपाथ पर , दफ्तरों के इर्द-गिर्द आने-जानेवालों की कई जरूरतें होती हैं। अगर किसी को चाय पीना हो, किसी को भूख लगी हो, किसी को नाश्ता करना हो तो उन्हें वे सुविधाएं मिल जाएं, तो आसानी होती है।

अक्षरधाम में गुड फ़ूड

इसके लिए रेहड़ी पटरी वाले, फल-सब्जी बेचनेवाले, खाने-पीने की वस्तुएं बेचनेवाले और तरोताजा करने वाली चीजें बेचनेवाले मिल जाएंगे। इनमें से ज्यादातर गांवों से पलायन कर रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंचे हैं।

यह ढाबेवाले, खोमचेवाले नालियों के किनारे, गली-कूचों में, पुलों के नीचे और जहां भी जगह मिल जाएं, ये टिक जाते हैं। लेकिन इन अनचाहे लोगों को शहर की आधिकारिक व्यवस्था का अंग नहीं माना जाता, जिनकी कई समस्याएं हैं। परेशानियां हैं। पर शहर में इनकी जरूरत भी है।

इन्हीं सबके मद्देनजर पौष्टिक भोजन अभियान की शुरूआत की गई। इस पहल में कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। किसानों, उत्पादक कंपनियों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे बिना रासायनिक व कीटनाशकों के खेती हो, जो पूर्ण रूप से जैविक हो। इन खाद्य उत्पादों को दिल्ली तक लाने और विक्रेताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

रेहटी-पटरी वालों को इनसे खाद्य पदार्थ बनाने और बेचने के लिए तैयार किया जा रहा है। और फिर उपभोक्ताओं व समुदाय को इस पौष्टिक भोजन के बारे में बताया जा रहा है, जिससे वे इसका स्वाद ले सकें और अपने भोजन में शामिल कर सकें।

जनपहल के धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि सबके लिए पौष्टिक भोजन का अभियान लोगों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, रेहटी-पटरी वालों की आय बढ़ेगी और आम उपभोक्ताओँ को स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल सकेगा। साथ ही स्वच्छता व साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जाएगा।

वे कहते हैं कि वैसे तो सबके लिए यह अभियान उपयोगी है पर शहरी गरीबों के लिए विशेष रूप से जरूरी है। शहरी गरीबों के लिए सहारा है, जो उन्हें कम आमदनी में भी में भी यहां टिके रहने में मदद करता है। ऐसे लोगों के लिए भी जिन्हें जल्दबाजी में काम पर जाना पड़ता है, या जो सैर-सपाटे के लिए निकले हैं तब उन्हें तरोताजा होने के लिए नाश्ता-भोजन की जरूरत होती है। इन सबके लिए फुटपाथ की खाने-पीने की चीजें जरूरी हैं।

जिनमें चाऊमीन, बर्गर, छोले-भटूरे, राम लड़्डू, समोसा, कचौरी, पानीपूरी ( गोलगप्पे), बिहार का लिट्टी- चोखा, दक्षिण भारत का इडली-डोसा, छोले कुलचे, रोटी-सब्जी आदि शामिल हैं। लेकिन ये सब चीजें पौष्टिक हों तो बहुत ही अच्छा विकल्प होगा।

वे आगे बताते हैं कि स्ट्रीट वेंडरों की संख्या शहर की 2 प्रतिशत होती है। यह अनुमान नेशनल पालिसी आन अर्बन स्ट्रीट वेंडर्स 2009 की रिपोर्ट में लगाया गया था। अब सरकार ने लंबी लड़ाई के बाद स्ट्रीट वेंडर्स ( जीविका सुरक्षा तथा स्ट्रीट वेंडिंग विनियम) विधेयक 2014 भी बना दिया है।

इसमें इनकी आजीविका की सुरक्षा करना और उन्हें उत्पीड़न से बचाना है। स्ट्रीट वेंडरों की सामाजिक सुरक्षा व उनके अधिकारों की रक्षा के लिए यह सही दिशा में कदम है। इससे वे पौष्टिक भोजन जैसी पहल में भागीदार बन पाएंगे।

जनपहल ने इस अभियान में कई काम किए हैं। इसके लिए मंडुवा, बाजरा, मक्का और कई पौष्टिक अनाजों के आटे ( मल्टीग्रेन) की तलाश की। इन फसलों को कुदरती व जैविक तरीके से उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। जैविक खेती करने के लिए इच्छुक किसानों को ऐसे किसानों के खेत का दौरा करवाया, जो कुदरती तौर पर बिना रासायनिक व कीटनाशक के खेती कर रहे थे। हरियाणा के रोहतक, पानीपत के कुछ गांवों में दौरा किया। जिसमें यमुना नदी के किनारे के किसान भी शामिल थे।

इस दौरे में कुदरती खेती अभियान के प्रोफेसर राजेन्दर चौधरी भी साथ थे,जिन्होंने इस खेती की बारीकियां बताईँ। किसानों को जैविक खाद्य अनाज की प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में मदद की। कृषि मंडियों को भी इससे जोड़ने की कोशिश की।

ई रिक्शा पर जुटी भीड़

जनपहल के कार्यकर्ता संजीब माली कहते हैं कि इस अभियान से कई लोग जुड़ रहे हैं। स्वास्थ्य के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ी है। फास्ट फ़ूड के इस दौर में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव के बारे में समझने लगे हैं। और इसलिए पौष्टिक भोजन की पहल से आसानी से जुड़ जाते हैं।

इसके लिए वे देशी अनाजों के व्यंजनों के जगह-जगह लगनेवाले मेलों में भी पौष्टिक खाने-पीने की चीजों का प्रचार करते हैं। प्रगति मैदान के मेले में मंडुवा का सूप और दिल्ली हाट में मंडुवा की पानीपूरी काफी पसंद की गई। नोएडा के सियाल पार्क व चितरंजन पार्क में भी लोगों ने इसका लुत्फ उठाया।

ज्वाला नगर में उपभोक्ताओं के साथ बैठक

वे आगे बताते हैं कि ई रिक्शा पर जैविक खाद्य पदार्थों का प्रचार-प्रसार करते हैं। जिसमें जैविक मसाले, तेल. दाल चीनी, शहद, चायपत्ती, पानीपूरी से लोगों को अवगत कराते हैं।  इसमें समाचार अपार्टमेंट के रेहड़ी चलाने वाले सूरज, अजंता मार्केट के सब्जी बेचनेवाले लखपत, ज्वाला नगर के मसाले, दाल-तेल बेचनेवाले सुरेश चौहान आदि ने बड़े उत्साह से भाग लिया। और इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा कल्याणपुरी के रेहटी वाले चन्द्रप्रकाश ने इसमें गहरी रूचि दिखाई है।

इस पहल का एक हिस्सा यह भी है कि लोग उनके भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। इसके लिए पौष्टिक अनाजों का आटा इस्तेमाल करें। गेंहू के आटे के साथ मंडुवा, चना, जौ, मक्का व बाजरा आदि अनाजों का आटा मिलाकर रोटी बनाएं। मोटा आटा पिसवाएं, क्योंकि यह पाचक होता है। फलों और सलाद को भोजन में शामिल करें। इस तरह लोगों ने अपनी रसोई में इन चीजों का ध्यान रखा है और रोजाना के भोजन में इसे शामिल कर लिया है।

कुल मिलाकर, यह बहुत ही उपयोगी और सार्थक पहल है। सराहनीय होने के साथ अनुकरणीय भी है। लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी हैं। जैविक खेती के लिए किसानों को तैयार करना, वहां से शहर तक इन अनाजों व सब्जियों को पहुंचाना, रेहटी-पटरी वालों को तैयार करना, उपभोक्ताओं को तैयार करना। और रेहटी-पटरी वालों की आजीविका की सुरक्षा करना, जिन्हें जब चाहे उजाड़ दिया जाता है। अब रेहटी-पटरी वालों के लिए नया कानून-स्ट्रीट वेंडर्स विधेयक बना है, जिसने उम्मीद जगाई है। आशा की जानी चाहिए कि जनपहल की यह कोशिश रंग लाएगी और लोगों को स्वस्थ भोजन मिल सकेगा, जो कि एक अच्छा विकल्प है।

लेखक से संपर्क करें

Read in English about this initiative by Janpahal – SELLING ON THE STREET by Shiba Desor

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Dr Sachin Barbde December 19, 2018 at 1:42 pm

It’s great and very first of kind innovative ideas to eat healthy food for healthy body.

Janpahal December 19, 2018 at 10:18 am

Thanks a lot Baba Mayaram ji for capturing our small initiative and taking it to wider public.

Dharmendra Kumar December 19, 2018 at 10:16 am

mouth watering story. inspiring to all for the greater GOOD

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