बीजों की परंपरागत संस्कृति और खेती पद्धतियों से खाद्य सुरक्षा संभव (in Hindi)

By बाबा मायाराम onNov. 22, 2017in Food and Water

देशी बीजों व देशी खेती का जो परंपरागत ज्ञान हैं लोक कथाएं हैं, उनको सहेजना जरुरी है, जिससे नई पीढ़ी में यह ज्ञान हस्तांतरित हो सके. जहां देशी बीज और परम्परागत खेती जिन्दा है, वहां परम्परागत खेती और किसान भी जिन्दा है. स्थानीय मिटटी पानी के अनुकूल देशी बीजों की परम्परागत विविधता की संस्कृति को सामने लाये जाने और ऐसी खेती की पद्धतियों की चर्चा की जाए जो बिना पर्यावरण का नुक्सान किये लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें. राजस्थान के गावों में मौजूद खाद्य विकल्पों की संस्कृति को सामने लाता प्रस्तुत आलेख.

सर्वोदय प्रेस सर्विस द्वारा प्रथम प्रकाशित 

Read an article on this Food Sangam event in English  A CONFLUENCE OF FOOD ALTERNATIVES!

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