बुंदेलखंड की बंडई नदी का पुनरुज्जीवन – सफलता की कहानी (in Hindi)

PostedonNov. 23, 2017inFood and Water

बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान द्वारा २००३ में किये गए मड़ावरा ब्लाक के २००० परिवारों के सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकला की धसान एवं बंडई नदी के किनारे के पर गावों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य की स्थिति बहुत ख़राब है. इस जंगली इलाके में भूख, गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा व्याप्त है. बुनियादी सुविधाओं का सर्वथा अभाव है. हजारों परिवार यहाँ अमानवीय जीवन जीने को विवश हैं. पानी, बिजली, रस्ते सड़क, स्कुल, अस्पताल की कमी है. लोग पैदल बैलगाड़ी युग में जी रहे हैं. 

सकरा गांव में भूख से मौत तक की जानकारी मिली द वीक पत्रिका में पढ़ने को भी मिला फिक्र घास की रोटी खाने की मज़बूरी मुख्य रूप से सहरिया आदिवासियों वनवासियों की दयनीय हालत की खबरें अखवारों की सुर्खियाँ बन चुकी थी. संसथान के सर्वेक्षण से इनकी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए समुदाय द्वारा कई सुझाव भी बताये गए संसथान ने भी सुझावों को समझा और क्रमशः शासन प्रशासन समुदाय मिडीया बुद्धिजीवियों समाजशास्त्रियों देश के प्रतिष्ठित समाज सेवियों के सहयोग लेने हेतु मड़ावरा धौरीसागर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास शुरू किये गए. 
वर्ष २००३ में ही बंडई नदी जो बरसात के बाद सुख जाती थी इस बंडई नदी के पानी को रोकने की माँग गाँव के प्रधान रामसिंह तथा उनके बूढ़े बुजुर्ग बंदू यादव सहित सैकड़ो ग्रामीणों ने की थी. तत्कालीन समस्याएँ जिला प्रशासन के साथ जनसुनवाई, समस्या समाधान शिविरों का आयोजन करके निपटाई जा रही थी, लोगों का विश्वास संसथान के प्रति बढ़ रहा था. इस उपेक्षित इलाके में चेतना जागरूकता की चिंगारी धीरे धीरे चिंगारी संगठन के रूप में दिखने लगी थी. बंडई नदी जो इस क्षेत्र की जीवनरेखा थी संस्थान इसके पानी को कैसे रोके यह सवाल उठ रहा था क्योंकि यह बिलकुल स्पष्ट था की अगर बंडई का पानी इकठ्ठा होगा तो भूख प्यास दोनों का समाधान मिल जायेगा, वर्ष भर पानी रहेगा तो बंडई नदी भी जिन्दा हो जाएगी. बंडई नदी का पानी धसान नदी के पानी में जाकर मिल जाता था. बंडई बरसात के बाद सुख जाती थी अर्थात मृतवत हो जाती थी. बंडई नदी को जिन्दा कैसे किया जाये बड़ा सवाल संसथान के मंत्री बासुदेवजी के मन में उठ रहा था. क्षेत्र की गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए संसथान के मंत्री ने तत्कालीन मण्डलायुक्त श्री शंकर अग्रवाल झाँसी मंडल घांसी को मिलकर क्षेत्र में आने की माँग की थी. संवेदनशील आयुक्त ने १७ जून २००६ को संसथान द्वारा आयोजित  जनसुनवाई में ग्राम कुर्रट और धौरीसागर आकर ऐतिहासिक कार्य किया. भविष्य में बंडई नदी पर काम करने की परियोजना बनाने का आश्वासन दिया. जुलाई अगस्त २००६ में धौरीसागर क्षेत्र से गिरार तक २० किमी की जल यात्रा निकली गई. १७ अगस्त २००६ पत्रानुसार आयुक्त महोदय ने शासन स्टार पर पैरवी प्रारम्भ की परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश शासन कृषि अनुभाग २ लखनऊ दिनांक २५  जुलाई २००६  के अनुसार प्रमुख सचिव कृषि की अध्यक्षता में सूखा से सम्बंधित ०३-०६-२००६ को हुई बैठक में उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम २००५  के प्राविधानों के अंतर्गत सूखे की आपदा से निपटने के लिए प्रदेश के लिए कार्ययोजना तैयार कर उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु श्री शंकर अग्रवाल आयुक्त झाँसी मंडल की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय आलेख समिति गठित की गई. इस समिति का सूखा 
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