समता, न्याय और सातत्यता की तरफ भारत: एक जन घोषणापत्र - फरवरी, 2019 (in Hindi)

By बाबा मायाराम द्वारा अनुवादित on April 1, 2019

[यह घोषणापत्र विकल्प संगम नामक प्रक्रिया से उभरकर बना है

विकल्प संगम विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे समूहों, आंदोलनों और व्यक्तियों को जोड़ने का एक मंच है, जो समता, न्याय और सातत्यता  से मनुष्य और पर्यावरण की बेहतरी के लिए काम करता है। यह मौजूदा विकास के उस ढांचे को अस्वीकार करता है, जो असमानता और अन्याय पर आधारित है। मौलिक विकल्पों की खोज करता है जो सोच, नजरियों और जमीनी स्तर पर किए जा रहे कामों में हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 50 से अधिक आंदोलन और संस्थाएं जुड़ी हैं।

निम्न बिन्दु पूरे घोषणापत्र का सारांश हैअंग्रेजी मे पूर्ण घोषणापत्र उपलब्ध है इस लिन्क पर: http://www.vikalpsangam.org/article/peoples-manifesto-for-a-just-equitable-and-sustainable-india-2019/]

समता, न्याय और सातत्यता का भारत बनाने जन घोषणापत्र

हम इन सबके लिए प्रतिबद्ध हैं और आप से इसकी मांग करते हैं:

हम देश में समता, न्याय और सातत्यता की व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह आज के लिए और आनेवाली पीढ़ियों के लिए है। राजनीतिक दलों, जन आंदोलनों, सामाजिक संस्थाओं और समूहों से हम इसके लिए प्रतिबद्धता चाहते हैं।

- मनुष्य के कल्याण व स्वास्थ्य के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं की सुनिश्चितता हो जिसमें भौतिक, सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिकता शामिल हैं। गरिमापूर्ण आजीविका हो।.

- प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार हो कि वह अपने जीवन को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से संबंधित निर्णय प्रकिया में प्रत्य़क्ष रूप से सार्थक भागीदारी कर सके।

- मनुष्य के लिए आवश्यक दशाओं में किसी भी प्रकार से लिंग, जाति, वर्ग, धर्म, रंग, योग्यता और अन्य किसी भी रूप से भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

- संस्कृतिक, आध्यात्मिक, और ज्ञानतंत्र की विविधता के प्रति एक-दूसरे से सम्मानजनक सहवास के लिये पहल हो।

- प्रकृति और पारिस्थितिकीयता के प्रति सम्मान रखें जिस पर सभी प्रकार का जीवन निर्भर है।

आज का संकट जिसका हम सामना कर रहे हैं, उस संदर्भ में यह सब प्रतिबद्धताएं (व संबंधित कदम, जो नीचे दिए गए हैं) तात्कालिक जरूरत है। संकट मे शामिल हैं: सामाजिक टकराव, तनाव, असहिष्णुता, असमानता, खराब स्वास्थ्य, सांस्कृतिक विविधता की कमी, परंपरागत ज्ञान और कौशल का अभाव और बड़े पैमाने पर पारिस्थितिकीय तंत्र की तबाही। इसका कारण मौजूदा प्रभुत्वशाली आर्थिक विकास और सत्तावादी प्रवृत्ति, व राज्य की धार्मिक विभाजनकारी सोच है।  यह सब पारंपरिक असमानता और कई तरह के भेदभाव ( लिंग, जाति ) से भी जुडे हैं। पिछले कुछ दशकों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को यह सब उल्टी दिशा में ले जा रहे हैं।

इन सब संकटों को जिनका देश सामना कर रहा है, यह प्रतिबद्धताएं हैं, जो हमारे संविधान के मूल्य भी हैं। इसमें और भी जो मूल्य जोड़े जा सकते हैं, जो सार्थक लोकतंत्र और गरिमापूर्ण समाज के लिए हों और यह सार्वजनिक योजनाओं के केन्द्र में हो। इसके लिए सभी तबकों में तात्कालिक और दीर्घाकालिक कामों की जरूरत है।

मोटे तौर पर हम उपरोक्त मुद्दों पर निम्न बिंदुपर नीतिगत और कार्यक्रम आधारित कार्रवाई की मांग करते हैं।

  1. विश्व में मानव अधिकार, शांति और निरस्त्रीकरण और पारिस्थितिकीय ज्ञान को पुर्नस्थापित करने में भारत की भूमिका के लिए पहल करना। संयुक्त राष्ट्र के पुनरोद्धार के जरिए वैश्विक निर्णयों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो, व्यापार और आर्थिक समझौता भी मानव अधिकार और पर्यावरण मानकों के अनुरूप हों।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या शांति और न्याय कायम करने में वृद्धि हुई?

  1. सभी तरह की योजनाएं, बजट, नीतियों, और कार्यक्रमों में पहली प्राथमिकता शोषित तबके के लोगों को मिलनी चाहिए।  लिंग, जाति, वर्ग, जातीयता, धर्म, रंग, योग्यता, शारीरिक विकलांगता, शिक्षा, स्थान या अन्य किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या इससे कमजोर तबकों का फायदा हुआ, क्या इससे भेदभाव कम हुआ?

  1. भारतीय समाज में बढ़ रही आर्थिक असमानता का सामना करने के लिए मजबूत उपाय करने होंगे। इसमें वेतन-भत्तों पर लगाम लगाना, आमदनी, संपत्ति और विरासत पर कर लगाना, कमजोर तबकों के लिए बुनियादी न्यूनतम आय और रोजगार गारंटी हो और प्राथमिक अर्थव्यवस्था से जुड़े मजदूरों के लिए पेशन इत्यादि की सुविधा हो।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या असमानता कम हुई है; जो मौजूदा समय में वंचित हैं, क्या वे सशक्त हुए हैं?

4. सभी तबकों के लोगों में फिर से सौहार्द्र स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम शुरू किए जाएं. चाहे वे किसी भी विश्वास, कौम, भाषा और वर्ग के हों। इसकी शुरूआत स्कूली स्तर से लेकर आगे तक की जा सकती है। और समाज के कई तबकों में जो झूठी खबरें, घृणा और वैमनस्यता फैला रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिससे सौहार्द स्थापित करने में मदद मिले।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या सौहार्द बढ़ा, क्या सामाजिक टकराव व तनाव कम हुए ?

5. लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्राम सभा व शहरी क्षेत्रों में मोहल्ला सभा को सशक्त बनाना। संविधान प्रदत्त अधिकारों के अलावा, आर्थिक और कानूनी अधिकार भी मान्य करना,  उनकी जिंदगी से सीधे जुड़े हैं। उनके इलाकों में किसी भी तरह की गतिविधि के लिए पूर्व सूचना देना और उनसे पूर्व अनुमति लेने को सुनिश्चित करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना। जैसे प्राकृतिक संसाधन या नदी क्षेत्रों में किसी प्रकार की गतिविधि करने के लिए गांव की सहमति लेना।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या लोगों की अर्थपूर्ण भागीदारी हुई, खासतौर पर शौषित होने वाले लोगों की?

6. राज्य के सभी संस्थानों में समावेशी नीतियों और कानूनों के आधार पर जवाबदेही और पारदर्शिता हो जिसमें राजनैतिक दल भी शामिल हों। और उन कानूनों को रद्द किया जाये जिनका सरकार या सत्ता पोलीस या फौज का इस्तेमाल करके जन संगठन व कार्यकर्ता पर हमला कारती है।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या यह पूरी तरह पारदर्शी है, क्या जवाबदेही बढ़ी है?

  1. 7.  बड़े पैमाने पर आजीविका आधारित कार्यक्रम होने चाहिए जिसमें आधुनिक और परंपरागत दोनों तरह के काम होंगे। सभी योजनाओं और बजटों में सबसे पहली प्राथमिकता कृषि ( चरवाही, वानिकी, मछलीपालन) और हस्तकला और लघु उद्योगों को मिलनी चाहिए। यह सभी उत्पाद और सेवाएं समुदाय आधारित लघु कुटीर और मध्यम श्रेणी उत्पादों की होनी चाहिए जो विकेन्द्रित उत्पाद हो, जो लोकतांत्रिक तरीके से (सहकारी समितियों या कंपनी या ट्रेड यूनियन) चलाई जाएं।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या कमजोर और हाशिये के लोगों की आजीविका सुरक्षित हुई, क्या सभी तरह की आजीविकाएं सम्मानजनक और गरिमापूर्ण हैं?

8. पानी और भूमि के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय नीति और योजना बने। जिसमें प्रक्रिति और पारिस्थितिकीय को संरक्षण करने के लिए कदम उठाएं जाएं, जिस पर सभी प्राणियों का जीवन निर्भर है। इसमें वन्यजीव और जैव विविधता भी शामिल है। मिट्टी, पानी और भूमि के पुर्नजनन और सुधार के लिए देशव्यापी कार्यक्रम चलाने चाहिए जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हो। यह सब कानूनी प्रावधान के जरिए होंगे जिससे स्थानीय समुदायों के अधिकारों को मान्यता मिले और वे सशक्त हों। इसमें वन अधिकार कानून है, और प्रकृति के अधिकार को संवैधानिक मान्यता हो।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या पारिस्थितिकीय तंत्र और पारिस्थितिकीय को बचाया जा सका?

9. सभी नीतियों और शासन-प्रणाली की आर्थिक योजनाओं में,  चाहे स्थानीय हो या राष्ट्रीय, सभी स्तरों पर पारिस्थितिकीय सीमाओं का सम्मान करना। सभी क्षेत्रों व सत्रों में स्वतन्त्र  रूप से, पूरी जन-भागीदारी के साथ सभी प्रोजेक्ट, कार्यक्रमों, योजनाओं का पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन होना चाहिए। रासायनिक और हानिकारक पदार्थ, जो कि मनुष्य या पारिस्थितिकीय तंत्र या जानवरों को नुकसान पहुंचाते हैं, की जगह उन पर्यावरण अनुकूल पदार्थ को बढावा दिया जाये, जो सुरक्षित और टिकाऊ हो।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या प्राकृतिक पर्यावरण टिकाऊ है और मनुष्य और वन्य जीवों के लिए पारिस्थितिकीय संरक्षित और सुरक्षित है?

10. सभी कार्यक्रमों में लोगों के लिए प्राथमिकता से बुनियादी सुविधाएं मुहैया हो। जैसे स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवास, शिक्षा, पानी, भोजन और ऊर्जा इत्यादि। इन सभी के लिए बजट में आवंटन पहले से ज्यादा की व्यवस्था हो। खाद्य पदार्थों का उत्पाद कृषि पारिस्थितिकीय और सुरक्षित प्रोसेसिंग से हो, यह छोटे किसान,पशुपालक, मछलीपालन की मदद से संभव है।  भूमि, बीज और पानी पर सामुदायिक अधिकार हो।

ज्यादातर ऊर्जा विकेन्द्रीकृत तरीके से अक्षय स्रोतों से उत्पादन के लिए पहल करनी चाहिए। 2030 तक पारिस्थितिकीय सीमाओं के मद्देनजर ऊर्जा की मांग को रखना होगा। और पानी स्रोतों को बचाने पर और पुर्नजनन करने पर ध्यान देना होगा, जो जीवन के लिए बहुमूल्य है।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या प्रत्येक को बुनियादी सुविधाएं सुरक्षित हुई हैं, उन तक पहुंची हैं और खासतौर से उन तक जो इससे वंचित थे, और वह पारिस्थितिकीय टिकाऊपन के साथ?

11. ग्रामीण और शहरी बसाहटों में गरिमापूर्ण, रहने लायक और टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए कदम उठाना। भूमि और आवास का अधिकार के साथ और समाज के कमजोर तबकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर।  इसके अलावा, सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था भी हो। गैर मोटर चलित परिवहन व पैदल सफर को प्राथमिकता हो जिसमें सुरक्षा की समुचित व्यवस्था हो।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या सबको टिकाऊ व रहनेलायक सुविधाएं पहुंची, खासतौर जो मौजूदा समय में वंचित हैं?

12. शिक्षा और सीखने की ऐसी पद्धति जो गतिविधि आथारित हो, खेल-खेल में हो, मजेदार हों और अपनी संस्कृति और पर्यावरण की जड से जुडी हो, न्याय और जवाबदारी से जुड़ी हो और खुद से सीखने की क्षमता को बढाये। सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के टिकाऊपन का सम्मान करने वाली शिक्षा हो। शिक्षा अधिकार अधिनियम में जरूरी संशोधन के जरिए इन्हें शामिल किया जाए। और समुदाय आधारित पद्धति बच्चों और वयस्कों के लिए हो। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कम से कम 4 प्रतिशत राशि का आवंटन किया जाए।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर-  क्या यह सबको व्यापक सीखने का अवसर प्रदान करता है, खासतौर उनमें जो मौजूदा समय में इससे वंचित हैं?

13. नवाचार, तकनीक और ज्ञान के आधार पर समन्वित नीति और कार्यक्रम बनना चाहिए जिससे सार्वजनिक और अनौपचारिक नवाचार और जनसाधारण की सृजनशीलता को बढ़ावा और मान्यता मिले। स्वतंत्र मीडिया के माध्यम से ज्ञान की उपलब्धता और उसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया जाए। सभी तकनीकी विकास को लोगों की समीक्षा के लिए रखा जाए जिससे वे इसे न्याय, पहुंच और टिकाऊपन के लक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में देख सकें।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या इससे लोकतंत्रीकरण बढा, और लोगों तक ज्ञान और तकनीक की पहुंच हुई?

14. सबके लिए स्वस्थ जीवन और स्वास्थ्य सेवाओं  तक उनकी पहुंच हो, इसके लिए समन्वित नीति और संबंधिक कार्यक्रम होने चाहिए। खासतौर से वंचित तबके के लिए जिसकी अब तक इन तक पहुंच नहीं है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए समग्र चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल भी हो जिसमें सभी चिकित्सा पद्धति शामिल हों। इसके साथ ही स्वस्थ रहने के लिए भोजन, भौतिक परिवेश, शिक्षा, सामुदायिक भागिदारी इत्यादि पर भी ध्यान दिया जाए। इस क्षेत्र के लिए राज्य और राष्ट्रीय बजट में कम से कम 10  प्रतिशत का प्रावधान सुनिश्चित हो।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या सबके लिए स्वास्थ्य की दशा सुधरी है, खासतौर से उनके लिए जो मौजूदा समय में इससे वंचित थे?

15. हर तराह की कला के लोकतंत्रीकरण व बढावे के लिए कदम उठाये जाये। जाति, लिंग वर्ग के आधार पर सीमित करने वाले भेदभाव को समाप्त किया जाये। सभी की पहुंच इस तक सुगम बनाना।  इनसे जुडी सार्वजनिक संस्थानों को स्वतंत्र बनाना, व उनमें सबकी पहुंच सुगम करना।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- सबके लिए कला तक पहुंचने का रास्ता क्या सुगम हुआ?

16. उपरोक्त सभी मे, भारत के युवा और महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान देना। वर्तमान और भविष्य बनाने में उनकी आवाज को मजबूत बनाना।

प्रत्येक सार्वजनिक कार्रवाई का जंतर- क्या युवा व महिला सशक्त होने की ओर बढे, आत्म सम्मान आत्म निर्भर्ता  के साथ?

सम्पूर्ण घोषणापत्र अंग्रेजी में पढ़िए  PEOPLE’S MANIFESTO FOR A JUST, EQUITABLE, AND SUSTAINABLE INDIA (2019)

घोषणापत्र मे शामिल सन्गठन व्यक्ति

Organisations/Movements/Networks

ACCORD (Tamil Nadu)

Alliance for Sustainable and Holistic Agriculture (national)

Alternative Law Forum (Bengaluru)

Ashoka Trust for Research in Ecology and the Environment (Bengaluru)

BHASHA (Gujarat)

Bhoomi College (Bengaluru)

Blue Ribbon Movement  (Mumbai)

Centre for Education and Documentation (Mumbai)

Centre for Equity Studies (Delhi)

CGNet Swara (Chhattisgarh)

Chalakudypuzha Samrakshana Samithi / River Research Centre (Kerala)

ComMutiny: The Youth Collective (Delhi)

Deccan Development Society (Telangana)

Deer Park (Himachal Pradesh)

Development Alternatives  (Delhi)

Dharamitra (Maharashtra)

Ekta Parishad (several states)

Ektha (Chennai)

EQUATIONS (Bengaluru)

Gene Campaign (Delhi)

Greenpeace India (Bengaluru)

Health Swaraaj Samvaad (national)

Ideosync (Delhi)

Jagori Rural (Himachal Pradesh)

Kalpavriksh  (Maharashtra)

Knowledge in Civil Society (national)

Kriti Team (Delhi)

Local Futures (Ladakh)

Maati (Uttarakhand)

National Alliance of Peoples’ Movements (national)

North East Slow Food and Agrobiodiversity Society (Meghalaya)

Peoples’ Science Institute (Uttarakhand)

reStore (Chennai)

Sahjeevan (Kachchh)

Sambhaavnaa (Himachal Pradesh)

Samvedana (Maharashtra)

Sangama (Bengaluru)

Shikshantar (Rajasthan)

Snow Leopard Conservancy India Trust (Ladakh)

SOPPECOM (Maharashtra)

South Asian Dialogue on Ecological Democracy (Delhi)

Students’ Environmental and Cultural Movement of Ladakh (Ladakh)

Thanal (Kerala)

Timbaktu Collective (Andhra Pradesh)

Titli Trust (Uttarakhand)

Tribal Health Initiative (Tamil Nadu)

URMUL (Rajasthan)

Video Volunteers (Goa)


Individuals

Dinesh Abrol (Delhi)

Ovais Sultan Khan (Delhi)

Sangeetha Sriram (Auroville)

Sanskriti Menon (Pune)

Sushma Iyengar (Bhuj)

Tashi Morup, Ladakh Arts and Media Organisation (Ladakh)

 

सम्पर्क

Ashish Kothari, chikikothari@gmail.com

Sujatha Padmanabhan, sujikahalwa@gmail.com

Shrishtee Bajpai, shrishtee.bajpai@gmail.com



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